गढ़वाल सभा मेरठ

संगछ्ध्वं संवदध्वं, सं वो मनासि जानतम |
देवाभागं यथा पूर्वे, संजानानां उपासते || (ऋग्वेदा)

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गढ़वाल सभा मेरठ

गढ़वाल सभा मेरठ सबको साथ लेकर अपने स्थापना काल से ही समता , प्रेम , विश्वास और सहकार समन्वय की भावना से कार्य करती आ रही है | गढ़वाल सभा द्वारा मेरठ में सभा भवन का निर्माण करना हमारी सामाजिक प्रतिबद्धता का घोतक है | उत्तराखंड की अद्भुद-अलौकिक सांस्कृतिक विरासत को हमने यहाँ संजोकर रखा है |